#कालचक्र
भारत के सबसे अमीर आदमी गौतम अडानी की बीवी का नाम पता है ? गूगल मत कीजिए पोस्ट पढ़िए..
सन 1760 के करीब ब्रिटेन और अमेरिका में औधोगिक क्रांति हुई। नई मशीनों और ट्रेंड लेबर के द्वारा उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई। मजदूरों की कमी को पूरा करने के लिए दूर दराज से मजदूरों को लाया जाता था जो बहुत खर्चीला था। ऊपर से उन्हें ट्रेंड करने पे खर्चा करना पढ़ता था। ऊपर से ये मजदूर नौकरी बदल लेते थे तो सारा खर्चा बर्बाद। उद्योगपतियों को स्थानीय लेबर की कमी पढ़ रही थी। वर्क फोर्स की कीमत बहुत महंगी थी।
एक चतुर उधोगपति के दिमाग में एक धूर्त आइडिया आया। अगले दिन प्रेस में एक आर्टिकल निकला की महिलाओं को भी बराबर पगार और काम मिलना चाहिए। उन्हें बराबरी के हक से कोई वंचित नहीं कर सकता। उस समय की प्रसिद्ध लेखिकाओं, समाज सेविका महिलाओं ने इस मुद्दे को हाथों हाथ लिया। प्रदर्शन हुए, डिबेट हुई। बराबर के वेतन को महिला पुरुष की बराबरी से जोड़ा जाने लगा। पुरुषों का तर्क था की पगार बराबर तो मेहनत और टारगेट भी बराबर हो।
उधोगप्तियों ने बराबर पगार और बराबर काम के टारगेट की बात मान ली। और अचानक से स्थानीय मजदूरों की संख्या दो गुनी हो गई। जहां 100 पुरुष थे वहीं 100 महिलाएं भी वर्क फोर्स में जुड़ गई। जब लोग बढ़ गए तो धीरे काम कम पढ़ने लगा और मजदूरी भी कम कर दी गई। जनसंख्या का एक बहुत बड़ा वर्ग जो सस्ता वर्क फोर्स था उसे उधोगपतीयों ने औने पौने दामों में एंप्लॉय कर लिया।
अब वापस पूछता हूं.. अडानी की पत्नी कहां काम करती है? अंबानी की बीवी कहां की मेनेजर है ? चलिए.. स्टीव जॉब्स, बिल गेट्स या मार्क जकरबर्ग की लुगाई कहां मेनेजर हैं ? जवाब है कहीं नहीं (फालतू NGO छोड़ के) लेकिन इनकी कंपनियों में जेंडर रेशियो के नाम पे निश्चित महिलाएं होने का कानून बना रखा है। महिलाओं को अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा देना इस दुनियां को बहुत बाद में याद आया, लेकिन उन्हें मजदूरी में जोत देने का कुटिल विचार बहुत दशक पहले आ गया था। इसी को कैपिटलिजम कहते हैं। #कालचक्र
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जय हिंद