विक्रम वेदा

विक्रम वेदा
कास्ट - ऋतिक रौशन, सैफ अली खान, राधिका आप्टे, शारिब हाशमी, रोहित सराफ, सत्यदीप मिश्रा, योगिता बिहानी.
निर्देशन - पुष्कर एवं गायत्री.
               जब किसी फिल्म से आप कनेक्ट होते हो और जब आपको पता चलता है कि उस फिल्म रिमेक किया जा रहा है तो आप कहीं ना कहीं निराश हो जाते हो.निराशा इस बात से नहीं होती कि उसका रिमेक हो रहा है, निराशा इस बात से होती है जब वह फिल्म आपकी उम्मीदों पर खरे ना उतरते हुए कुछ और ही बन जाती है .
     विक्रम वेधा के रिमेक की घोषणा और फिर विजय सेतुपति सर के किरदार को ऋतिक सर द्वारा निभाया जाना, यह ख़बर, यह संकेत दे रहा था कि शायद, ये फिल्म इसके मूल वर्जन के साथ इंसाफ ना कर पाए और फिर कहीं ना कहीं ट्रेलर की रिलीज के बाद ऋतिक सर के संवाद कहने की शैली भी इसी ओर इशारा कर रही थी 
         यकीन मानिए, जब कोई फिल्म आपको झूठा ठहराकर, आगे निकल जाती है ना तो  इसका लुत्फ ही कुछ और होता है, बशर्ते आप इसे कबूल पाएं कि आप गलत थे.
           जी हां, यह फिल्म शुरू से अंत तक आपको बांधे रखती है.कसा हुआ निर्देशन, बेहतरीन पटकथा आपको शुरू से अंत तक बांधे रखती है. हां, ये बात सच है कि फिल्म से जुड़े  रहने के लिए आपको एक एक दृश्य और फिर एक एक संवाद बहुत से देखना और सुनना पड़ेगा क्योंकि यदि आपने कुछ वक्त के लिए परदे से ध्यान हटाया तो फिल्म में बहुत कुछ घट चुका होगा.
        लच्छा पराठा में जिस तरह भंवर रूपी लेयर्स होती हैं ठीक उसी तरह इस फिल्म के हर मोड़ पर एक नई लेयर है.जिन्होंने इसका मूल देखा है वो भी इस फिल्म का लुत्फ उठाएंगे और जिन्होंने तमिल वर्जन देखी ही नही है, वे तो इसका सम्पूर्ण आनंद लेंगे.
        फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर का विशेष उल्लेख करना चाहता हूं जो इस फिल्म का मुख्य स्तंभ है. सभी कलाकारों का काम उल्लेखनीय है, चाहे वो शारिब हाशमी साहब हों, रोहित सराफ हों या फिर सत्यदीप मिश्रा.
      राधिका आप्टे को स्क्रीन पर कम समय मिला है, पर उनका काम अच्छा है.ना जाने खांस की कौनसी दौड़ चल रही है और ना जाने कौन किसे पहला और दूसरा घोषित करता है पर मेरा सच तो यह है कि खान लोगों की दौड़ में अगर किसी का नाम ग्रोथ के मामले में ऊपर आना चाहिए तो वो सैफ हैं क्योंकि उनका ग्राफ हमेशा ऊपर की तरफ गया है.
          अब रही बात ऋतिक सर की तो जो मेरे हिसाब से इस फिल्म का सबसे रिस्की चुनाव था वही इस रेस का असली घोड़ा साबित हुआ है..उनका स्वैग, उनका स्टाइल, उनका अंदाज़ बेहद ज़बरदस्त है.कहीं से यह नहीं लगता कि उन्हें कोई शंका हुई होगी कि वे वेधा को नहीं निभा पाएंगे.उनका आत्मविश्वास अलग ही स्तर का है और इसके चलते यदि उनकी कुछ कमियां भी होंगी तो वो ढंक जाती है.उनकी अपने भाई के साथ बॉन्डिंग वाली केमिस्ट्री भी देखते ही बनती है.
       अतः फिल्म पूर्णरूप से देखने योग्य है.बिना किसी विलंब के आप टिकट घर का रुख कर सकते हैं.
#सबकी_मां_सिनेमा

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