महंगाई
खूब हुईं महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार महंगाई जिंदाबाद देश भर में जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है वो किसी से छुपी नहीं है। बढ़ती कीमतों ने लोगों की समस्याओं को और बढ़ा दिया है, जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा समाज के गरीब तबके को उठाना पड़ रहा है। इस पर संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन (यूएनसीटीडी) द्वारा जारी ताजा विश्लेषण से पता चला है कि खाद्य कीमतों में 10 फीसदी के उछाल से, निर्धन परिवारों की आय में 5 फीसदी की गिरावट आ जाती है। देखा जाए तो यह राशि इतनी है जितनी वो परिवार आमतौर पर अपनी स्वास्थ्य देखभाल सम्बन्धी जरूरतों पर खर्च करता है। यूएनसीटीडी के अनुसार देश भर में तेजी से आसमान छूती महंगाई और बढ़ता कर्ज बड़ी समस्या बन चुका है। इसके साथ-साथ खाद्य पदार्थों और ऊर्जा साधनों की बढ़ती कीमतों के चलते करोड़ों लोग जीवन यापन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। पिछले दो साल महामारी से जूझने के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति भी नाजुक हो चुकी है। ऊपर से यूक्रेन में जारी युद्ध और जलवायु में आते बदलावों ने स्थिति को बद से बदतर बना दिया है। आंकड़ों की मानें तो आज 60 फीसदी मजदूरों की वास्तविक आय महामारी से पहले की तुलना में कम है। इतना ही नहीं दुनिया के 60 फीसदी सबसे कमजोर देश कर्ज के दलदल में फंसे हुए हैं। अनुमान है कि अफ्रीका में 5.8 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बस थोड़ा ऊपर हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर 410 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड’ से पता चला है कि 2021 में करीब 82.8 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार थे। यह आंकड़ा कितना विशाल है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह भारत की करीब 59 फीसदी आबादी के बराबर है। वहीं 230 करोड़ लोगों को दो जून की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है। जिन लोगों को खाना मिल भी रहा है उनकी स्थिति भी कोई ख़ास अच्छी नहीं है। पता चला है कि स्वस्थ आहार दुनिया में 310 करोड़ लोगों की पहुंच से बाहर है। देखा जाए तो एफएओ द्वारा जारी फूड प्राइस इंडेक्स करीब-करीब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है और पिछले साल की तुलना में इस समय 20.8 फीसदी ज्यादा है। यही हाल ऊर्जा क्षेत्र का भी है। जहां कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है। वहीं ऊर्जा कीमतों में भी 2021 की तुलना में इस साल 50 फीसदी वृद्धि की आशंका है। ऐसा ही कुछ उर्वरकों के साथ भी हो रहा है जिनकी कीमतें 2000 से 2020 के औसत की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी हैं। लेकिन मोदी सरकार और उनके मंत्रियों की मानें तो देश में कहीं भी महंगाई नहीं है ना तो देश कुपोषित है और ना ही आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरत पर कोई असर नही है
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जय हिंद